ऋषिकेश और हरिद्वार में ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा

जनमंच टुडे। देहरादून। गत कुछ वर्षों से चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में निरन्तर बढ़ोत्तरी हो रही है। राज्य प्रशासन श्रद्धालुओं को उचित सुविधायें प्रदान करने हेतु निरन्तर प्रयासरत है। इसी क्रम में आगामी चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधायें प्रदान करने हेतु पर्यटन विभाग द्वारा ऑनलाईन के साथ-साथ ऑफलाईन पंजीकरण सुविधा भी प्रारम्भ किये जाने का निर्णय लिया गया है। जिन श्रद्धालुओं ने ऑनलाईन माध्यम से पंजीकरण नहीं कराया है, उनके लिए दिनांक 08 मई, 2024 से ऋषिकेश तथा हरिद्वार में ऑफलाईन पंजीकरण की सुविधा प्रारम्भ की जा रही है। श्रद्धालु हरिद्वार में राही मोटल तथा ऋषिकेश में यात्रा पंजीकरण कार्यालय एवं ट्रांजिट कैम्प पर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। प्रत्येक धाम के लिए प्रतिदिन ऑफलाईन पंजीकरण की सीमा ऋषिकेश में 1,000 तथा हरिद्वार में 500 निर्धारित की गयी है। श्रद्धालु चारों धामों की यात्रा के लिए पंजीकरण काउन्टरों पर अग्रेत्तर अधिकतम 03 दिवसों के लिए पंजीकरण करवा सकते हैं। साथ ही पर्यटन विभाग द्वारा श्रद्धालुओं हेतु यात्रा को सुगम बनाये जाने के लिए उत्तराखण्ड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के पुरोहितों के साथ बैठक की गयी, जिसमें विभाग के साथ समन्वय हेतु महापंचायत द्वारा चारों धामों के तीर्थ पुरोहितों केे नामांकन किये गये हैं। प्रत्येक धाम से दो तीर्थ पुरोहितों का नामांकन किया गया है। यमुनोत्री धाम से पं पुरषोत्तम उनियाल तथा पं अनिरूद्ध उनियाल, गंगोत्री धाम से पं रंजनीकांत सेमवाल तथा पं निखिलेश सेमवाल, केदारनाथ धाम से पं संतोष त्रिवेदी तथा पं पंकज शुक्ला एवं बद्रीनाथ धाम से पं बृजेश सती तथा पं प्रवीन ध्यानी का नामांकन किया गया है। तीर्थ पुरोहित धामों के यात्रा प्रबन्धन की वास्तविक स्थिति से पर्यटन विभाग को समय पर अवगत करवाते रहेंगे। साथ ही श्रद्धालुओं हेतु अतिरिक्त सुविधाओं के लिए विभाग को अपने सुझाव भी प्रस्तुत करेंगे। विभाग की यह पहल पुरोहितों से प्राप्त होने वाले सुझावों पर ससमय कार्यवाही करते हुए यात्रा को सुगम बनाने के लक्ष्य से की गयी है, जिस हेतु संयुक्त निदेशक पर्यटन को समन्वयक के रूप में कार्य किये जाने हेतु निर्देशित किया गया है। सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने कहा कि इस प्रकार के समन्वय से यात्रा के दौरान आने वाली विषमताओं से शीघ्रता पूर्वक निवारण में सुविधा होगी तथा भविष्य के लिए बेहतर योजना तैयार करने में सहायता मिलेगी।

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